
Karnataka कर्नाटक: नए जनप्रतिनिधियों और नेताओं को राज्य के राजनीतिक इतिहास, महत्वपूर्ण कानूनी बहसों तथा पूर्व मुख्यमंत्रियों, स्पीकरों और मंत्रियों के योगदान से अवगत कराने के लिए एक ‘पॉलिटिक्स कॉलेज’ शुरू करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
यह जानकारी लेजिस्लेटिव काउंसिल के चेयरमैन बसवराज होरट्टी ने मंगलवार को विधान सौध में पूर्व मंत्री बी. बसवलिंगप्पा की जन्म शताब्दी समारोह के दौरान दी। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई युवा नेता रामकृष्ण हेगड़े, के. एच. पाटिल और बी. बसवलिंगप्पा जैसे पुराने और अनुभवी नेताओं के योगदान से अनजान हैं, जो चिंता का विषय है।
होरट्टी ने कहा कि नए चुने गए विधायकों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है, ताकि वे राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक इतिहास को समझ सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्तमान में कितने नेता नियमित रूप से किताबें पढ़ते हैं और अपने क्षेत्र के इतिहास को जानते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले के नेताओं और आज के नेताओं के बीच कार्यशैली और समझ में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। प्रस्तावित पॉलिटिक्स कॉलेज इस कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है और नए जनप्रतिनिधियों को शासन और नेतृत्व के बारे में बेहतर जानकारी दे सकता है।
समारोह के दौरान होरट्टी ने पूर्व मंत्री बी. बसवलिंगप्पा के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में देवराज उर्स की सरकार में मंत्री रहते हुए बसवलिंगप्पा ने अपने “बूसा” (चारा) संबंधी बयान से सामाजिक बहस को जन्म दिया था, जिसने समाज में समानता और सामाजिक न्याय पर चर्चा को आगे बढ़ाया।
होरट्टी ने उन्हें एक विचारशील नेता और बुद्धिजीवी बताते हुए कहा कि बसवलिंगप्पा ने दलित विचारधारा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि बसवलिंगप्पा अपने विभाग से जुड़े मामलों का गहन अध्ययन करते थे और विधानसभा में स्पष्ट और तथ्यपूर्ण जवाब देते थे।
कार्यक्रम में लॉ मंत्री एच. के. पाटिल ने भी विचार व्यक्त किए और सुझाव दिया कि अगला शताब्दी समारोह धारवाड़ में आयोजित किया जाना चाहिए। यह कार्यक्रम बी. बसवलिंगप्पा जन्म शताब्दी समिति और बेंगलुरु विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
कुल मिलाकर, इस पहल के जरिए सरकार का उद्देश्य है कि नए राजनीतिक नेतृत्व को राज्य की ऐतिहासिक और प्रशासनिक विरासत की बेहतर समझ दी जाए, ताकि वे अधिक जिम्मेदार और सूचित निर्णय ले सकें।





